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राधा-कृष्ण के प्रेम और विछोह की मार्मिक कथा

राधा कृष्ण का अविभाज्य स्वरूप  कृष्ण बचपन में प्यारी प्यारी शैतानियाँ किया करते थे । एक बार सजा के बतौर कृष्ण की माता यशोदा ने कृष्ण को ओखल से बाँध दिया तब ठीक उसी समय राधा वहां आ पहुँची । राधा की कृष्ण से यह पहली मुलाकात थी । कृष्ण को देखकर राधा को उनसे प्रेम हो गया । उनके मिलन की यूं तो अलग अलग कई कहानियाँ हैं। कई जगह लोगों ने उल्लेख किया है कि राधा पहली बार गोकुल अपने पिता वृषभानु जी के साथ आई थी तब श्रीकृष्ण को उन्होंने पहली बार देखा था।इस बात का भी उल्लेख मिलता है कि पहली बार संकेत तीर्थ पर दोनों आपस में मिले थे । बहरहाल ओखल से बंधे कृष्ण को देखकर राधा के दिल में प्यार उमड़ आया , उन्हें लगा कि उनका रिश्ता तो जन्म जन्म का है । कृष्ण के भीतर भी राधा के लिए वही प्यार उमड़ने लगा । दोनों एक दूसरे को देखकर एकदम बेसुध होने लगे थे । भक्त और भगवान का रिश्ता जन्म जन्म का होता है , जब भक्त और भगवान साक्षात मिलते हैं तो आपस में बातें नहीं होतीं बल्कि वे एक दूसरे को दिल से , भाव से महसूस करते हैं । राधा और कृष्ण का प्रेम भी भावों पर आधारित प्रेम है जो अद्वितीय है और उसका कोई विकल्प नहीं है। ...

रामायण का जीवन में महत्व . Ramayan ka Jivan men Mahatva

 

रामायण का जीवन में महत्व अनेक रूपों में है. रामायण के नित्य पाठ और उन पाठों से मिली सीख के माध्यम से मनुष्य जीवन को सहज, सरल और सुन्दर बनाया सकता है. रामायण में समाहित विभिन्न अध्याय/काण्ड के पाठों की अगर हम समीक्षा करें तो उनसे बहुत गूढ़ बातें निकल कर सामने आती हैं. वो कौन सी प्रमुख प्रमुख बातें हैं, आईये हम उनका विश्लेषण करने की कोशिश करते हैं-

नित्य रामायण पाठ से प्रशस्त होता है आध्यात्म का रास्ता 

गुरू के प्रति प्रेम और अटूट विश्वास से मिलती है जीवन में मुक्ति

रामायण में माता शबरी और उनके गुरु मतंग ऋषि का प्रसंग आता है. मतंग ऋषि अपने निर्वाण के समय उनकी शिष्या माता शबरी से कहते हैं कि इस आश्रम से कहीं मत जाना, एक दिन यहाँ भगवान राम चलकर आएँगे. शबरी की  अपने गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा और अगाध प्रेम रहता है. उनकी बातों के प्रति उसका विश्वास अटल रहता है. वह आश्रम तक पहुँचने वाले रास्ते पर हर दिन फूल बिछाकर राम की प्रतीक्षा करती रहती है. और एक दिन सचमुच राम वहां चलकर आते हैं और शबरी को नवधा भक्ति का वरदान देकर उसे मोक्ष प्रदान करते हैं. जीवन में कोई सच्चा गुरू मिले तो उसकी बातों पर विश्वास करके हम भी मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं.   

रामायण देता है सबके साथ समान व्यवहार की सीख 

रामायण पाठ और उस पर अमल से सबसे बड़ी सीख जो हमें मिलती है वह है सबके साथ समान व्यवहार करना। भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल में सभी के साथ समान व्यवहार किया. उन्होंने कभी भी लोगों को जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से नहीं देखा, सबके साथ उनकी समदृष्टि रही . प्रकृति और मनुष्य के बीच भगवान राम ने एक जो नया संबंध गढ़ा , वह सम्बन्ध बताता है कि सच्चा मनुष्य वही है जो मनुष्य , पशु और प्रकृति सभी के साथ समान व्यवहार करे.

 

रामायण बताता है जीवन में अच्छी संगति का महत्त्व

अच्छी संगति मनुष्य जीवन में तरक्की के लिए बहुत जरूरी है इसकी शिक्षा हमें रामायण पाठ से मिलती है. अगर मनुष्य गलत संगति में पड़ जाता है तो जीवन में आगे बढ़ने का उसका रास्ता रुक जाता है. इसका जीवंत उदहारण देखें तो कैकयी, अपनी  दासी मंथरा के बहकावे में आकर उसकी गलत बातों और बुरे विचारों से प्रभावित होती है , फिर महाराज दशरथ से राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांग लेती है. कैकेयी को जो जग निंदा मिली है बुरी संगति का ही परिणाम है.

अनुशासन और मर्यादा से जीवन बनता है सुन्दर

रामायण पाठ में हम देखते हैं कि भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल में कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया, इसलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम कहलाए . हमेशा अनुशासन में रहकर राम ने संयमित आचरण का पालन भी किया । रामायण से यह बात सीखने को मिलती है कि अनुशासन सुखी जीवन के लिए अत्यंत बहुत महत्वपूर्ण है। जीवन में पालन की जाने वाली मर्यादाएं मनुष्य को आने वाले संघर्षो से जूझने की शक्ति देती हैं. सुखमय जीवन के लिए मर्यादा, संयम और अनुशासन बहुत जरूरी है.

त्याग और समर्पण का महत्व बताता है रामायण

रामायण में भरत का अपने बड़े भाई राम के प्रति जो समर्पण और त्याग की भावना का वर्णन है वह अतुलनीय है. भरत का चरित्र इसके माध्यम से शीर्ष पर पहुँच जाता है . किसी भी काम को पूरा करने के लिए मनुष्य को हमेशा त्याग और समर्पण का भाव रखना चाहिए . इससे आगे का रास्ता बहुत उज्ज्वल होता है. जीवन में तरक्की पाने के लिए मनुष्य को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और उस कार्य में पूरी तरह समर्पित होना पड़ेगा. भगवान राम के लिए हनुमानजी का प्रेम और उनकी नि:स्वार्थ सेवा हमें सिखाती है कि आराध्य के चरणों में बिना किसी संदेह के अपने आपको समर्पित कर देना चाहिए. यही मनुष्य जीवन में मुक्ति का मार्ग है.

जीवन में एकता का महत्त्व सिखाता है रामायण

रामायण में कई ऐसे प्रसंग आते हैं जहाँ एकता और एक समान दृष्टि का भाव मिलता है . दशरथ की तीन पत्नियां थीं और चार पुत्र थे, सभी अलग-अलग चरित्र के थे , फिर भी वे सभी एक साथ रहते थे. भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करते समय अपनी सेना में मनुष्य और पशु पक्षी सभी को समभाव रखते हुए शामिल किया . इससे उनको लंका पर विजय प्राप्त करने में मदद मिली. मनुष्य और पशु पक्षी सभी ने अपनी उपयोगिता साबित की . एकता से राम को विजय हासिल हुई. मनुष्य को अपने जीवन में भी इसे अमल में लाना चाहिए.

क्षमा का भाव मनुष्य को सुरक्षित और सबसे बड़ा बनाता है

रामायण के प्रसंगों में यह मिलता है कि भगवान राम में सबके प्रति हमेशा प्यार और दया का भाव रहा है. वे बदला लेने से अच्छा क्षमा करने पर विश्वास करते हैं . माता सीता का हरण करना रावण के अंत का कारण बना था. इससे पता चलता है कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में हम खुद ही समाप्त हो जाते हैं. किसी को  क्षमा करने से विवाद उत्पन्न नहीं होते , यह क्षमा भाव मनुष्य को बचाए रखता है.

रामायण सिखाता है वचनों पर कायम रहने की बात

'रघुकुल रीति सदा चली आई , प्राण जाई पर वचन न जाई ||'

रामायण की यह चौपाई हमें सिखाती है कि मनुष्य के दिए हुए सार्वजनिक वचनों का बड़ा महत्व होता है. अगर मनुष्य अपने वचनों को निभाता है तो उसके प्रति लोगों का विश्वास बना रहता है, न निभाने की स्थिति में वह अपना विश्वास खो देता है . रामायण हमें सिखाता है कि हम अपने दिए गए वचनों को निभाकर अपनी मनुष्यता के विश्वास को कायम रखें. 


रामायण की उपरोक्त बातों को जीवन में अमल करके हम अपने जीवन को सफल और सुन्दर बना सकते हैं.

 

-प्रतिमा शर्मा

अक्षय तृतीया का महत्त्व Akshaya Tritiya Ka Mahatva

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हनुमान रामायण के एक ऐसे पात्र हैं जिन्हें जीवन में गुरु की जगह देकर उन्हें आराध्य बनाया जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि कलियुग में हनुमान ही एक ऐसे देव हैं जो जागृत अवस्था में हमारे आसपास हमेशा मौजूद रहते हैं ।उन्हें राम सबसे प्रिय हैं , इसलिए जहाँ राम नाम का जप होता है वहां वे आसन जमाकर बैठ जाते हैं । ऎसी मान्यता आज भी है कि जहाँ भी रामकथा होती है, उनकी मौजूदगी अवश्य होती है। रामकथा के अंत में उन्हें ससम्मान विदा भी किया जाता है। हनुमान को जीवन में गुरू मानकर उनके  कथा प्रसंगों से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं । आइये जानते हैं कि उन्हें गुरु बनाकर हमें क्या लाभ हो सकता है -  हमारे जीवन के गुरु श्री हनुमान जी    समस्या एवं समाधान की पहचान करना सिखाते हैं हनुमान  रामायण में हनुमान जी से जुड़े हुए अनेक किस्से कहानियाँ आती हैं । उन कहानियों में एक कहानी यह है कि जब रावण ने जंगल से सीता का अपहरण किया तो उनकी खोज में राम और लक्ष्मण जंगल में यहाँ वहां भटकने लगे । राम जब शबरी के आश्रम गए तो शबरी ने उन्हें बताया कि पम्पा नदी के पास   सुग्रीव मिलेंगे वहां जाकर उनसे भेंट ...

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गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस को दुनिया का एक पवित्र ग्रन्थ माना जाता  है। इस ग्रन्थ में प्रातः स्मरणीय भगवान श्री राम की महिमा का ऐसा वर्णन आता है जो कहीं और हमें सुलभ नहीं हो पाता है । इसी पवित्र ग्रन्थ रामचरित मानस में एक दोहा आता है, इस दोहे में बाबा   गोस्वामी तुलसीदास जी हमें लिखकर बताते हैं .... राम भक्त हनुमान जी पर कृपा बरसाते हुए भगवान श्री राम  कलयुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरा ही पारा ! गोस्वामी तुलसीदास जी के श्रीमुख से निकले इस दोहे का अर्थ यह है कि कलयुग में केवल श्रीराम के नाम से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। कलयुग में मात्र राम नाम की महिमा को जपने से ही अपने जीवन के उद्देश्य को हम साकार कर सकते हैं । जो सच्चे मन से प्रभु राम का नाम जप लेता है उसके जीवन की नैय्या हर मझधार से निकलते हुए शांतिपूर्वक आगे बढ़ने लगती है। बाबा तुलसी ने इस दोहे के बहाने यह बताने का प्रयास किया है कि राम नाम की महिमा हर युग में मोक्ष प्रदान करने वाली रही है, चाहे राम नाम का सहारा भक्त प्रहलाद ने लिया हो, चाहे माता शबरी ने लिया हो, चाहे द्रोपदी ने लिया हो, ...

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