रामायण का जीवन में महत्व अनेक रूपों में है. रामायण के नित्य पाठ और उन पाठों से मिली सीख के माध्यम से मनुष्य जीवन को सहज, सरल और सुन्दर बनाया सकता है. रामायण में समाहित विभिन्न अध्याय/काण्ड के पाठों की अगर हम समीक्षा करें तो उनसे बहुत गूढ़ बातें निकल कर सामने आती हैं. वो कौन सी प्रमुख प्रमुख बातें हैं, आईये हम उनका विश्लेषण करने की कोशिश करते हैं-
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| नित्य रामायण पाठ से प्रशस्त होता है आध्यात्म का रास्ता |
गुरू के प्रति प्रेम
और अटूट विश्वास से मिलती है जीवन में मुक्ति
रामायण में माता शबरी और उनके गुरु
मतंग ऋषि का प्रसंग आता है. मतंग ऋषि अपने निर्वाण के समय उनकी शिष्या माता शबरी
से कहते हैं कि इस आश्रम से कहीं मत जाना, एक दिन यहाँ भगवान राम चलकर आएँगे. शबरी
की अपने गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा और अगाध
प्रेम रहता है. उनकी बातों के प्रति उसका विश्वास अटल रहता है. वह आश्रम तक
पहुँचने वाले रास्ते पर हर दिन फूल बिछाकर राम की प्रतीक्षा करती रहती है. और एक
दिन सचमुच राम वहां चलकर आते हैं और शबरी को नवधा भक्ति का वरदान देकर उसे मोक्ष
प्रदान करते हैं. जीवन में कोई सच्चा गुरू मिले तो उसकी बातों पर विश्वास करके हम
भी मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं.
रामायण देता है सबके
साथ समान व्यवहार की सीख
रामायण पाठ और उस पर अमल से सबसे बड़ी सीख जो
हमें मिलती है वह है सबके साथ समान व्यवहार करना। भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल
में सभी के साथ समान व्यवहार किया. उन्होंने कभी भी लोगों को जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से नहीं देखा, सबके साथ उनकी समदृष्टि रही . प्रकृति
और मनुष्य के बीच भगवान राम ने एक जो नया संबंध गढ़ा , वह सम्बन्ध बताता है कि सच्चा मनुष्य
वही है जो मनुष्य , पशु और प्रकृति सभी के साथ समान व्यवहार करे.
रामायण बताता है
जीवन में अच्छी संगति का महत्त्व
अच्छी संगति मनुष्य जीवन में तरक्की के लिए
बहुत जरूरी है इसकी शिक्षा हमें
रामायण पाठ से मिलती है. अगर
मनुष्य गलत संगति में पड़ जाता है तो जीवन में आगे बढ़ने का उसका रास्ता रुक जाता
है. इसका जीवंत उदहारण देखें तो कैकयी, अपनी दासी मंथरा के बहकावे में आकर उसकी गलत बातों और बुरे विचारों से
प्रभावित होती है , फिर महाराज दशरथ से राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांग लेती
है. कैकेयी को जो जग निंदा मिली है बुरी संगति का ही परिणाम है.
अनुशासन और
मर्यादा से जीवन बनता है सुन्दर
रामायण पाठ में हम देखते हैं कि भगवान राम ने
अपने पूरे जीवन काल में कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया, इसलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान
श्रीराम कहलाए . हमेशा अनुशासन में रहकर राम ने संयमित आचरण का पालन भी किया । रामायण
से यह बात सीखने को मिलती है कि अनुशासन सुखी जीवन के लिए अत्यंत बहुत महत्वपूर्ण
है। जीवन में पालन की जाने वाली मर्यादाएं मनुष्य को आने वाले संघर्षो से जूझने की
शक्ति देती हैं. सुखमय जीवन के लिए मर्यादा, संयम और अनुशासन बहुत जरूरी है.
त्याग और समर्पण का महत्व बताता है रामायण
रामायण में भरत का अपने बड़े भाई राम के प्रति जो
समर्पण और त्याग की भावना का वर्णन है वह अतुलनीय है. भरत का चरित्र इसके माध्यम
से शीर्ष पर पहुँच जाता है . किसी भी काम को पूरा करने के लिए मनुष्य को हमेशा त्याग
और समर्पण का भाव रखना चाहिए . इससे आगे का रास्ता बहुत उज्ज्वल होता है. जीवन में
तरक्की पाने के लिए मनुष्य को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और उस कार्य में पूरी तरह
समर्पित होना पड़ेगा. भगवान राम के लिए हनुमानजी का प्रेम और उनकी नि:स्वार्थ सेवा
हमें सिखाती है कि आराध्य के चरणों में बिना किसी संदेह के अपने आपको समर्पित कर
देना चाहिए. यही मनुष्य जीवन में मुक्ति का मार्ग है.
जीवन में एकता
का महत्त्व सिखाता है रामायण
रामायण में कई ऐसे प्रसंग आते हैं जहाँ एकता और
एक समान दृष्टि का भाव मिलता है . दशरथ की तीन पत्नियां थीं और चार पुत्र थे, सभी अलग-अलग चरित्र के थे , फिर भी वे सभी
एक साथ रहते थे. भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करते समय अपनी सेना में मनुष्य और पशु
पक्षी सभी को समभाव रखते हुए शामिल किया . इससे उनको लंका पर विजय प्राप्त करने
में मदद मिली. मनुष्य और पशु पक्षी सभी ने अपनी उपयोगिता साबित की . एकता से राम
को विजय हासिल हुई. मनुष्य को अपने जीवन में भी इसे अमल में लाना चाहिए.
क्षमा का भाव
मनुष्य को सुरक्षित और सबसे बड़ा बनाता है
रामायण के प्रसंगों में यह मिलता है कि भगवान
राम में सबके प्रति हमेशा प्यार और दया का भाव रहा है. वे बदला लेने से अच्छा क्षमा
करने पर विश्वास करते हैं . माता सीता का हरण करना रावण के अंत का कारण बना था.
इससे पता चलता है कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में हम खुद ही समाप्त हो जाते
हैं. किसी को क्षमा करने से विवाद उत्पन्न
नहीं होते , यह क्षमा भाव मनुष्य को बचाए रखता है.
रामायण सिखाता है वचनों पर कायम रहने की बात
'रघुकुल रीति सदा चली आई , प्राण जाई पर वचन न जाई ||'
रामायण की यह चौपाई हमें सिखाती है कि मनुष्य के दिए हुए सार्वजनिक वचनों का बड़ा महत्व होता है. अगर मनुष्य अपने वचनों को निभाता है तो उसके प्रति लोगों का विश्वास बना रहता है, न निभाने की स्थिति में वह अपना विश्वास खो देता है . रामायण हमें सिखाता है कि हम अपने दिए गए वचनों को निभाकर अपनी मनुष्यता के विश्वास को कायम रखें.
रामायण की उपरोक्त बातों को जीवन में अमल करके हम अपने जीवन को सफल और सुन्दर बना सकते हैं.
-प्रतिमा शर्मा

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